शुक्रवार, 16 सितंबर 2016

तजुर्बे

कम्बक्त
जिन्दगी
सांसो के
दरमीयां
हि रह गई !
'फलक'
तजुर्बे इतने
हो गये कि
मंजिल
कि ख्वाहिश
हि खत्म
हो गई ...।।



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