जिन्दगी
शुक्रवार, 16 सितंबर 2016
तजुर्बे
कम्बक्त
जिन्दगी
सांसो के
दरमीयां
हि रह गई !
'फलक'
तजुर्बे इतने
हो गये कि
मंजिल
कि ख्वाहिश
हि खत्म
हो गई ...।।
1 टिप्पणी:
Unknown
15 दिसंबर 2016 को 1:43 am बजे
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