और मेरी जुस्तजु ,आज तू भी नहीं चाहिए मुझे...!!
जिन्दगी
शनिवार, 15 अगस्त 2026
शनिवार, 19 जुलाई 2025
तेरे बग़ैर भी दिल को करार रहता है
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तेरे बग़ैर भी दिल को करार रहता है,
ये दर्द है कि कोई शहकार रहता है।
हम उनके दर से उठे भी तो इस अदब के साथ,
कि जैसे सज्दे में कोई इंकार रहता है।
मुलाक़ात की उम्मीद अब नहीं बाक़ी,
मगर निगाह में अब भी इंतज़ार रहता है।
हुस्न-ए-वफ़ा की उनसे न कोई तर्ज़ मिली,
हमारे इश्क़ में ही क्यों इख़्तियार रहता है?
जो बात दिल में थी, वो लफ़्ज़ों में आ न सकी,
ग़ज़ल में हर शेर अधूरा-सा-प्यार रहता है।
तू क्या गया कि आईना भी शर्मिंदा हुआ,
चेहरे पे अब भी तेरा असर बेशुमार रहता है।
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"विकार"
मैंने प्रेम किया —
जैसे सूखे वृक्ष में फिर पत्ते फूटे,
हरियाली छाई हो मन के श्मशान पर।
मैंने चाहा —
तू मुझे स्पर्श कर ले,
जैसे मृत्यु से छीन लाऊँ जीवन।
पर तू आई नहीं।
मैंने प्रतीक्षा की —
खुद को भूखा रखा,
देह गलती रही,
मन कुंठित होकर भीतर ही भीतर
सड़ता रहा।
हृदय —
एक मृत बालक बन गया था,
जिसे मैंने गोदी में लेकर
हर रात थपकियाँ दीं।
तू नहीं लौटी।
अब प्रेम मेरा
गंधाता है,
कुचले हुए सपनों की दलदल में,
जहाँ कीड़े उगते हैं
तेरी स्मृति से —
जैसे कोई पवित्र मूर्ति
सड़ चुकी हो भीतर से।
मैं अब भी तुझे चाहता हूँ —
हाँ, उसी जले-सले तन से,
जिसे तू छोड़ चुकी है
भूत की तरह।
क्योंकि प्रेम...
शुद्ध नहीं होता सदा —
कभी वह विक्षिप्त भी होता है।
कभी वह
विभत्स भी होता है।
सोमवार, 23 दिसंबर 2024
वक्त
वक्त बड़ा अजीब है साहब यहां
अपने ही अपनों को नीचा दिखा रहे हैं
जिन को चलना सिखाया था कभी
वही हमें अब चलने की हकीकत समझा रहे हैं
जिन के सिले थे हमने पजामे कई
वही हमें अब पेबंद लगाना सिखा रहे हैं
बुधवार, 17 मई 2023
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