के बखत की आंधी चाली
चांरु कानी अंधयारो है
कदे ज्ञान बांटता था जैका
आज बान्ह पिसो प्यारो है
अ जिन्दगी तेरा ख्याल हि
गुनाह हो गया हैं
अब तो मेरे लिए ,
जमाना
हसरत-ऐ -मासूक रखता है ,
यहाँ दिदार-ऐ-मासूक भी
मुमकिन नहीं
अब तो मेरे लिए...😢
चल अ जिन्दगी
कुछ और
हि फलसफे गढत़े हैं ,
जो अपने होने का
दम्भ भराते थे,
उन्होने तो
अपने तेवर दिखा ही दिये...!