शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

फलसफे

जिंदगी के फलसफे
 घड़ते हैं रोज

 कुछ डहते हैं 
कुछ रह जाते हैं रोज 

जिक्रे फलसफे 
करना भी जरूरी है 
सांसो का क्या भरोसा 
घटती है रोज

 फलक  हरम में उनके
 हराम है सुकून 
वह गुस्ताखियां करते हैं रोज   
                                   

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

बखत

के बखत की आंधी चाली

चांरु कानी अंधयारो है

कदे ज्ञान बांटता था जैका

आज बान्ह पिसो प्यारो है

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

मंगलवार, 11 जून 2019

रिवायते

चल अ फलक

कुछ और ही

तदबीर करते है ,

यहाँ कि रिवायते

ईजाजत देती नहीं

इश्क कि ...

गुरुवार, 2 मई 2019

मेरे लिए

अ जिन्दगी तेरा ख्याल हि

गुनाह हो गया हैं

अब तो मेरे लि ,

जमाना

हसरत-ऐ -मासूक रखता है ,

यहाँ दिदार-ऐ-मासूक भी

मुमकिन नहीं

अब तो मेरे लिए...😢

शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

तेवर


चल अ जिन्दगी

कुछ और

हि फलसफे गढत़े हैं ,

जो अपने होने का

दम्भ भराते थे,

उन्होने तो

अपने  तेवर दिखा ही दिये...!

रविवार, 18 नवंबर 2018

मुक्कमल

क्या करूं ,

तेरी मेहरबानियां का

जिक्र

नहीं होता मुझसे ,

मैं

इतना भी तो

मुकम्मल नहीं हूं