अ जिन्दगी तेरा ख्याल हि
गुनाह हो गया हैं
अब तो मेरे लिए ,
जमाना
हसरत-ऐ -मासूक रखता है ,
यहाँ दिदार-ऐ-मासूक भी
मुमकिन नहीं
अब तो मेरे लिए...😢
अ जिन्दगी तेरा ख्याल हि
गुनाह हो गया हैं
अब तो मेरे लिए ,
जमाना
हसरत-ऐ -मासूक रखता है ,
यहाँ दिदार-ऐ-मासूक भी
मुमकिन नहीं
अब तो मेरे लिए...😢
चल अ जिन्दगी
कुछ और
हि फलसफे गढत़े हैं ,
जो अपने होने का
दम्भ भराते थे,
उन्होने तो
अपने तेवर दिखा ही दिये...!
अ संगे-दिल
हदे-एतबार भी अजीब हैं ना
ये हर बार
तुम पे यकीन कर हि लेता है ना
तुझ से रुठने कि वजह तो
बहुत ढुंडी थी मैने
तू हर बार
बिना लफ्जो के
मना हि लेता है ना
ना तेरा दिल तब,
ना अब पसीजता है मेरे लिए
पर ये मेरा दिल
हर बार मुझे समझा हि लेता है ना
अ फ़लक कोन कहता है
पागलपन बुरा है
यही तो है जो उसकी
हर खता भूला देता है ना
...! 75-
अ फलक
मैरे कुछ अपनो के
मुझ पे अहसान है
इस कदर कि ,
मेरी तो
खाक को भी
ये हिदायत है कि
उनके लीबाज से
ना लिपटे ......!